उसे grammar नहीं सिखाई जाती । यहाँ तक की आज भी हम हिन्दी मे भी सही grammar का इस्तेमाल नहीं करते।
ऐसा नहीं है की इंग्लिश grammar का कोई महत्व नहीं है लेकिन अगर आप इंग्लिश बोलना सीखना चाहते है तो इसका महत्व कम हो जाता है। grammar की importance exams मे ज्यादा होती है। लगभग 95% लोग grammatically correct इंग्लिश नहीं बोलते इसलिए इसपर ज्यादा ज़ोर न दे।
2) लोग क्या सोचेंगे बहुत से लोग इस बात से डर के या शर्म की वजह से दूसरों के साथ इसलिए इंग्लिश मे बात नहीं करते क्योकि उन्हे लगता है की अगर उन्होने कोई लाइन गलत बोल दी या grammar का सही से use नहीं किया या कोई गलत word बोल दिया तो लोग उनका मज़ाक उड़ाएंगे। लेकिन असली मे ऐसा होता नहीं है। हर किसी के मन मे अपने लिए insecurity की भावना रहती है इसलिए ये सोचना बंद कर दे। जो आता है उसे खुलकर बोले। नवजोत सिंह सिधु के भाषा मे बोला जाए तो – दुनिया का सबसे बड़ा रोग क्या सोचेंगे मेरे बारे मे लोग। यह एक बीमारी की तरह है जो आपके रास्ते का सबसे बड़ा काँटा है।
3) think in English आप मे से बहुत से लोग जो इंग्लिश बोलना (English speaking) चाहते है लेकिन एक गलती कर देते है। वो गलती है मन मे हिन्दी to English translation करना और फिर जवाब देना। इसकी वजह से आपका दिमाग automatic processing नहीं कर पाता। इसलिए मन मे हिन्दी के बजाय इंग्लिश मे सोचना शुरू करे फिर चाहे वो grammatically गलत क्यो न हो। शुरुआत मे यह काम थोड़ा बोर या मुश्किल भी लग सकता है लेकिन धीरे धीरे आपका दिमाग इसे एक आदत की तरह लेने लगेगा। और एक समय ऐसा आयगा जब हिन्दी की तरह इंग्लिश मे भी जवाब automatically आएगा। उदहारण के तौर पर – जब कोई इंसान ड्राइविंग सीखता है तो शुरू शुरू मे तो काफी दिक्कत